





॥१॥
॥२॥
स्वर्ग सरी गर्भ राखी हाम्रो जन्म दियौं आमा
आँचलमा लोली खेलाई दुख सारा लियौं आमा
घाम पानी पीर ब्यथा दुख सारा आफै लिई
अमृतझै दुध खुवाई भाकै आफै जियौं आमा
दुख संग दिन राती घर बारीकाेे काम गरी
छोरा छोरी भन्दा भन्दै तन सारा खियौ आमा
भोकै बसी जीन्दगीमा सेवा गर्दा गर्दै आज
वृद्धाअवस्था बृद्धाश्रममा आँशु झारी पियौ आमा
आमा भन्दा प्यारी आज श्रीमति नै भए पछि
पशुपति देउघाट किन बस्ने थियौ आमा
॥४॥
बसे थे दिलाैं में दिवानी वही थी
बिताए पलाैं की कहानी वही थी
छिपाया वही देख पाये अभी ताे
हुअा गाेलियाैं की निशानी वही थी
किसी ने दिया फूलबारी बनाके
दिखा जो नयाँ रूप बानी वही थी
यहीँ अात्म मेरा पराया यहीँ है
यहीँ था जमाना कमानी वही थी
दिये हौसला जाे भरोसा किया था
दिखा जो नयाँ रूप रानी वही थी
यहीँ कामना है मुझे प्यारका जाे
रहेगी अधूरी बेगानी वही थी
टुटा प्यार मेरा बंधा जो अभी था
नहीं हार मानूं पुरानी वही थी
दिखा लाल अाँखे पिया ने डराया
रहेगी सदा जिन्दगानी वही थी
स्वरचित माैलिक
लक्ष्मी दत भट्ट

































