लक्ष्मीभट्टका केही उत्कृष्ठ गजलहरु

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टुटे हुए रिश्ते से रिश्ता मिलाते चलाे
दुनियाँ मैं कुछ ताे नेकी कमाते चलाे
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चाँद में भी दाग ढूँढ लेते है दुनियाँ
सभिकाे बंधुत्वका पाठ पढाते चलाे
माँ बाप दादा दादी रहते है जहाँ पे
विश्वासका ऐसा ही घर वनाते चलाे
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जोड़कर अपनी कमाई जो है साथ
कुछ भाग नेकी के लिए लुटाते चलाे
जिन्दगी का पुराना पेज मोड़कर देखाे
माँ ओर वतन के चित्र बनाते चलाे
भराे अपना दामन दुआ से बडाें की
अपनी जिन्दगी खुशी से सजाते चलाे

॥१॥

पसेर शान्त देशमा सिमान्त के चलाउछौं
र अग्निपुञ्ज देश याे मसाल के जलाउछौ
समाजले सुमार्ग मै बनाउदै छ देशमा
छ शान्तिको तलासमा पराई के गलाउछौ
हजार मार्ग छन् यहाँ कहाँ छ पुग्नु खै तिमी
छ शान्त यो समाज नै अशान्ति के फलाउछौ
अनादि देखि भूमि यो सुशान्त कै सारले
समाज चल्छ नीति मै अनीति के पलाउछौ
अधीर छैन यो सदा सु सभ्यता छ गाउँमा
छ शैल झै अखण्ड यो समाज के ढलाउछौ
सु सभ्यता र संस्कृति प्रभा शशी अनन्तमा
यसै गरी बसी रहे बिनास के दलाउछौ

॥२॥

स्वर्ग सरी गर्भ राखी हाम्रो जन्म दियौं आमा
आँचलमा लोली खेलाई दुख सारा लियौं आमा
घाम पानी पीर ब्यथा दुख सारा आफै लिई
अमृतझै दुध खुवाई भाकै आफै जियौं आमा
दुख संग दिन राती घर बारीकाेे काम गरी
छोरा छोरी भन्दा भन्दै तन सारा खियौ आमा
भोकै बसी जीन्दगीमा सेवा गर्दा गर्दै आज
वृद्धाअवस्था बृद्धाश्रममा आँशु झारी पियौ आमा
आमा भन्दा प्यारी आज श्रीमति नै भए पछि
पशुपति देउघाट किन बस्ने थियौ आमा

॥४॥

बसे थे दिलाैं में दिवानी वही थी
बिताए पलाैं की कहानी वही थी
छिपाया वही देख पाये अभी ताे
हुअा गाेलियाैं की निशानी वही थी
किसी ने दिया फूलबारी बनाके
दिखा जो नयाँ रूप बानी वही थी
यहीँ अात्म मेरा पराया यहीँ है
यहीँ था जमाना कमानी वही थी
दिये हौसला जाे भरोसा किया था
दिखा जो नयाँ रूप रानी वही थी
यहीँ कामना है मुझे प्यारका जाे
रहेगी अधूरी बेगानी वही थी
टुटा प्यार मेरा बंधा जो अभी था
नहीं हार मानूं पुरानी वही थी
दिखा लाल अाँखे पिया ने डराया
रहेगी सदा जिन्दगानी वही थी

स्वरचित माैलिक
लक्ष्मी दत भट्ट

Dhnagadhi & Krishanapur